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पश्मीना उत्पादों को बीआईएस(BIS) प्रमाण-पत्र मिला – Exam Guider

पश्मीना उत्पादों को बीआईएस(BIS) प्रमाण-पत्र मिला

पश्मीना उत्पादों को बीआईएस(BIS) प्रमाण-पत्र मिला

(Bureau of Indian Standards)
2 अगस्त, 2019 को भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards – BIS) ने पश्मीना उत्पादों की शुद्धता प्रमाणित करने के लिए उसकी पहचान, निशानी और लेबल लाने की प्रक्रिया को भारतीय मानक के दायरे में रख दिया है। खानाबदोश पश्मीना चरवाहे चांगथांग प्रतिकूल और कठिन इलाके में रहते हैं और अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह से पश्मीना पर निर्भर हैं। वर्तमान में 2.5 लाख बकरियों को पालने वाले 2400 परिवार हैं।

प्रमाणीकरण की आवश्यकता
पश्मीना के बीआईएस(BIS) प्रमाणीकरण से नकली या घटिया उत्पादों पर रोक लगेगी। उल्लेखनीय है कि ऐसे उत्पादों को बाजार में असली पश्मीना के नाम पर बेचा जाता है।
* स्थानीय कारीगरों और खानाबदोशों के हितों की रक्षा करना, जो पश्मीना कच्चे माल के उत्पादक हैं।
* ग्राहकों के लिए पश्मीना की शुद्धता का आश्वासन देना।

नकली या घटिया उत्पादों को हतोत्साहित करेगा और बाजार में वास्तविक पश्मीना के रूप में बचा जाएगा।
* युवा पीढ़ी को इस पेशे में बने रहने के लिए प्रेरित करेगा और साथ ही अधिक परिवारों को इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

छांगथंगी या पश्मीना बकरी

* छांगथांगी या पश्मीना बकरी लद्दाख के ऊंचे क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इन्हें बेहतरीन कश्मीरी ऊन के लिए पाला जाता है।

* इसे हाथ से बुना जाता है और कश्मीर में इसकी शुरुआत हुई थी। छांगथांगी बकरी के बाल बहुत मोटे होते हैं और इनसे

विश्व का बेहतरीन पश्मीना प्राप्त होता हैं, जिसकी मोटाई 12-15 माइक्रोन के बीच होती है।
इन बकरियों को घर में पाला जाता है और ग्रेटर लद्दाख के

छांगथांग क्षेत्र में छांगपा नामक घुमंतू समुदाय इन्हें पालते हैं।

छांगथांगी बकरियों की बदौलत छांगथांग, लेह और लद्दाख क्षेत्र में अर्थव्यवस्था बहाल हुई है। इन बकरियों को आमतौर पर पालतू और खानाबदोश समुदायों द्वारा पाला जाता है, जिन्हें ग्रेटर लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में चांगपा कहा जाता है।

क्या है भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ?

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है, जो उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तत्वावधान में काम करता है।
> यह भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 द्वारा स्थापित किया गया है।
> बीआईएस का प्रशासनिक नियंत्रण रखने वाले मंत्रालय या विभाग के प्रभारी मंत्री BIS के पदेन अध्यक्ष होते हैं।संरचना –  एक कॉर्पोरेट निकाय के रूप में, इसमें केंद्रीय या राज्य सरकारों, उद्योग, वैज्ञानिक और अनुसंधान संस्थानों और उपभोक्ता संगठनों से 25 सदस्य होते हैं।

बीआईएस प्रमाणीकरण से लाभ

कश्मीर हजारों वर्षों से पश्मीना शॉलों का निर्विवाद निर्माता रहा है। पश्मीना का उत्पादन और निर्यात कश्मीर के लोगों के लिए एक विशेष व्यापारिक अवसर प्रदान करता है। साथ ही बीआईएस प्रमाणीकरण मिलने के बाद पश्मीना के व्यापार में वृद्धि होने की संभावना है। इस प्रमाणीकरण से पश्मीना उत्पादों में मिलावट में रोक लगेगी और पश्मीना कच्चा माल तैयार करने वाले घुमंतू कारीगरों तथा स्थानीय दस्तकारों के हितों की रक्षा होगी। इससे उपभोक्ताओं के लिए पश्मीना की शुद्धता भी सुनिश्चित होगी।

* उल्लेखनीय है कि घुमंतू पश्मीना बकरी पालक समुदाय छांगथांग के दुर्गम स्थानों में रहते हैं और आजीविका के लिए पश्मीना बकरी पर ही निर्भर हैं। इस समय 2400 परिवार ढाई लाख बकरियों का पालन कर रहे हैं।

* पश्मीना के बीआईएस प्रमाणीकरण से इन परिवारों के हितों की रक्षा होगी और युवा पीढ़ी इस व्यवसाय की तरफ आकर्षित होंगे। इसके अलावा अन्य परिवार भी इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

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