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राष्ट्रीय डोप रोधी एजेंसी (नाडा) – Exam Guider

राष्ट्रीय डोप रोधी एजेंसी (नाडा)

राष्ट्रीय डोप रोधी एजेंसी (नाडा)

डोप-रोधी नियम प्रतिस्पर्धा नियमों की तरह ही उन शर्तों को नियंत्रित करने वाले खेल नियम होते हैं जिनके तहत खेल, खेले जाते हैं। एथलीट, एथलीट सहायक कार्मिक और अन्य व्यक्ति इन नियमों को भागीदारी की शर्त के रूप में स्वीकार करते हैं और उन्हें इनका पालन करना होगा। ये खेल विशिष्ट नियम और प्रक्रियाएं जिनका उद्देश्य एक वैश्विक और सुसंगत वातावरण में डोप-रोधी सिद्धांतों को लागू करना है, सर्वथा भिन्न प्रकृति के होते हैं।

राष्ट्रीय डोप-रोधी एजेंसी (नाडा) ने विश्व डोप-रोधी ‘कोड’ को स्वीकार किया है। ये डोप-रोधी नियम इस कोड के तहत नाडा (NADA)की जिम्मेदारियों के अनुरूप अपनाए और कार्यान्वित किए जाते हैं तथा वे भारत में डोपिंग समाप्त करने के नाडा के सतत प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए सहायक हैं। यह कोड नाडा को भारत द्वारा निर्दिष्ट निकाय के रूप में परिभाषित करता है जो राष्ट्रीय स्तर पर डोप-रोधी नियम अपनाने और कार्यान्वित करने, नमूनों के एकत्रीकरण के निदेश देने, परीक्षण परिणामों के प्रबंधन और सुनवाई करने के लिए मुख्य प्राधिकरण है।

वर्ष 1999 के प्रारम्भ में खेलों में डोपिंग पर लुसाने, स्विटजरलैंड में पहला विश्व सम्मेलन आयोजित किया गया और जिसके कारण वर्ष 1999 के अंत में विश्व डोप रोधी एजेंसी (वाडा) का सृजन किया गया।

भारत सरकार विश्व डोप रोधी एजेंसी (वाडा) (1999-2000) के सदस्यों में से एक है वाडा(WADA), जो खेलों में डोपिंग के विरुद्ध मानक स्थापित करता है, ने 5 मार्च, 2003 को कोपहेगन, डेनमार्क में वाडा कोड को अपनाया। विभिन्न राज्य पक्षकारों में से एक भारत ने दिसम्बर, 2014 में डोप-रोधिता पर कोपहेगन घोषणा पर हस्ताक्षर किए।

कोड के अनुसार,राष्ट्रीय डोप-रोधी एजेंसी (नाडा) को 24.11.2005 को एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया था। 2007 में, तीसरा विश्व सम्मेलन मैड्रिड, स्पेन में आयोजित किया गया और इसमें कोड के संशोधित संस्करण को अंतिम रूप दिया गया। डोप रोधी संबंधी कोपहेगन घोषणा और डोपिंग के विरूद्ध यूनेस्को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (1 फरवरी, 2007) का हस्ताक्षरकर्ता होने के नाते नाडा ने 7 मार्च, 2008 को विश्व डोप रोधी कोड को स्वीकार किया और वाडा के कोड के अनुरूप नाडा के डोप रोधी नियम (एडीआर) तैयार किए।

राष्ट्रीय डोप-रोधी कार्यक्रमः भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय डोप-रोधी एजेंसी (नाडा) की स्थापना भारत के लिए स्वतंत्र डोप-रोधी संगठन के रूप में कार्य करने के उद्देश्य से की गयी थी। नाडा के पास निम्नलिखित के लिए आवश्यक प्राधिकार और जिम्मेदारी है:-

डोपिंग नियंत्रण में योजना, समन्वय, कार्यान्वयन, मानिटरिंग और सुधारों की वकालत करना, अन्य संगत राष्ट्रीय संगठनों, एजेंसियों और अन्य डोप-रोधी संगठनों के साथ सहयोग करना, राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी संगठनों के बीच पारस्परिक परीक्षण कोप्रोत्साहित करना, डोप-रोधी अनुसंधान का संवर्धन, जहां निधियां प्रदान की जाती हैं, किसी ऐसे एथलीट अथवा एथलीट सहायककर्मी की अयोग्यता की अवधि के दौरान उसकी सारी निधियां अथवा कुछ निधियां रोकना जिसने डोप-रोधी नियमों का उल्लंघन किया हो, डोपिंग के प्रत्येक मामले में एथलीट सहायक कार्मिक या अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता की जांच सहित इसके अधिकार क्षेत्र में डोप-रोधी नियमों के सभी संभावित उल्लंघन पर कार्रवाई करना, और डोप-रोधी सूचना और शिक्षा कार्यक्रमों की योजना, कार्यान्वयन और मानीटरिंग करना।

नाडा अनुशासनिक प्राधिकरणों (डोप रोधी अनुशासनिक पैनल और डोप रोधी अपील पैनल) से भिन्न एक स्वतंत्र निकाय है। नाडा की स्थापना 1980 के सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में की गई थी और इसने 1 जनवरी, 2009 से कार्य आरंभ कर दिया था।

नाडा के प्रबंधन और कार्य का दायित्व शासी निकाय जिसमें युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री इसके अध्यक्ष, सचिव ( खेल) इसके उपाध्यक्ष, और 4 अन्य सदस्य, 2 प्रबुद्ध प्रतिषठित वैज्ञानिक और सदस्य सचिव के रूप में नाडा के महानिदेशक शामिल हैं, का है नाडा का वित्त- पोषण अनुदान के माध्यम से युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

डोपरोधी अनुशासनात्मक पैनलः

इस पैनल की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जिला और सेशन न्यायाधीश द्वारा की जाती है तथा इसके सदस्य कानूनी, चिकित्सा, खेल क्षेत्र से प्रतिष्ठित व्यक्ति होते हैं। डोप रोधी अपील पैनलः इस पैनल की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाती है और इसके सदस्य चिकित्सा और खेल क्षेत्र के प्रतिषठित व्यक्ति हैं।

राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल):

राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल) युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक स्वायत निकाय है। यह प्रयोगशाला आईएसओ/आईईसी 17025 (2003) के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशाकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड और मानव खेलों से मूत्र और खून नमूनों की जांच के लिए विश्व डोप रोधी एजेंसी (सितम्बर, 2008) द्वारा प्रत्यायित है। एनडीटीएल विश्व में 34 वाडा प्रत्यायित प्रयोगशाला में से एक और एशिया में 8वीं प्रयोगशाला है। एनडीटीएल में अनुसंधान के लिए अति आधुनिक सुविधाएं हैं और विभिन्न परियोजनाओं पर अनुसंधान करती है।

एनडीटीएल का लक्ष्य भारत में खेलों में डोप परीक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करना और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार गुणवत्तापरक परीक्षण की सेवाएं प्रदान करना है। एनडीटीएल ने अप्रैल, 2014 में आईएसओ/ आईईसी 17025:2005 प्रत्यायन प्राप्त करने के पश्चात् जुलाई, 2014 से रुटीन होर्स डोप परीक्षण आरंभ किया। एनडीटीएल भारत में सभी प्रमुख रेस क्लबों से होर्स डोप परीक्षण नमूने प्राप्त करता है।

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