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सिविल सेवा के चार उम्मीदवारों को तकनीकी सेवा के लिए अनफिट माना – Exam Guider

सिविल सेवा के चार उम्मीदवारों को तकनीकी सेवा के लिए अनफिट माना

एलएनजेपी ने सिविल सेवा के चार उम्मीदवारों को तकनीकी सेवा के लिए अनफिट माना

लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल (एलएनजेपी) ने सिविल सेवा परीक्षा में सफल घोषित हुए चार उम्मीदवारों को पहले तो मेडिकल जांच में सही ठहराया तथा बाद में रिपोर्ट बदलकर उन्हें तकनीकी सेवाओं के लिए अयोग्य करार दिया। अब कार्मिक मंत्रालय ने इन छात्रों को नोटिस जारी कर कहा कि वे तकनीकी सेवा में नहीं जा सकते।

इन चार छात्रों को एलएनजीपी के मेडिकल बोर्ड ने पहले अपनी मेडिकल रिपोर्ट में सभी सेवाओं के योग्य माना था लेकिन बाद में रिपोर्ट में बदलाव करके कहा कि इनमें से दो छात्रों का कद छोटा है तथा दो के सीने का फुलाव संतोषजनक नहीं है। इसलिए चारों को तकनीकी सेवाओं के लिए अयोग्य करार दिया है।

कार्मिक मंत्रालय ने कहा कि यदि छात्रों को इस रिपोर्ट पर कोई आपत्ति है तो सात दिनों के भीतर उन्हें अपील फाइल करनी होगी वर्ना उन्हें यह रिपोर्ट स्वीकार करनी होगी। अपील के दौरान यदि दोबारा मेडिकल बोर्ड बिठाने पर खर्च आता है तो उसका भुगतान छात्रों को करना होगा। दूसरे, अब जो रिपोर्ट आएगी उसे मानना अनिवार्य होगा। उसके बाद कोई अपील नहीं सुनी जाएगी।

72825 प्रशिक्षु भर्तीः जल्द बनेंगे सहायक अध्यापक, 25 से 28 अगस्त के बीच होगी परीक्षा

प्रशिक्षु शिक्षक अब जल्द ही सहायक अध्यापक बनेंगे। प्रदेश में चल रही 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में छह महीने का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अभ्यर्थियों की परीक्षा 25 से 28 अगस्त के बीच होगी। परीक्षा में सफल होने पर उन्हें सहायक अध्यापक के पद पर तैनाती मिलेगी।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी)अब इनकी परीक्षा करवाएगा। एससीईआरटी ने ऐसे अभ्यर्थियों का ब्यौरा मंगवाया है जिन्होंने छह महीने का प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है। अभी तक लगभग 57 हजार प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती हो चुकी है। अनुमान के मुताबिक 50 फीसदी अभ्यर्थी बुनियादी शिक्षा में छह महीने का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं।
वे अब परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। अभी इन्हें 7300 रुपए मानदेय मिल रहा है जबकि सहायक अध्यापक के पद पर लगभग 29 हजार रुपए वेतन मिलेगा।
दरअसल, ये भर्ती बीएड पास अभ्यर्थियों से की जा रही है। बीएड में बुनियादी शिक्षा के बारे में नहीं पढ़ाया जाता। लिहाजा इससे संबंधित प्रशिक्षण विभाग इन अभ्यर्थियों को देता है और इसके बाद परीक्षा में सफल होने पर ही सहायक अध्यापक के पद पर तैनाती दी जाती है। इन्हें तीन महीने का क्रियात्मक प्रशिक्षण स्कूलों में दिया गया है जिसमें प्रशिक्षुओं ने बाकायदा कक्षाओं को पढ़ाया है। वहीं तीन महीने का सैद्धांतिक प्रशिक्षण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान व ब्लॉक संसाधन केन्द्रों पर दिया गया है।

मध्यप्रदेश बना देश में सर्वाधिक बांस प्रजाति वाला राज्य

भोपाल (ब्यूरो मप्र)।आज बाँस की 54 प्रजाति के रोपण के साथ मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक बाँस प्रजाति रोपित करने वाला राज्य बन गया है। भोपाल के लहारपुर ईकोलॉजिकल पार्क में बाँस रोपण की शुरूआत मुख्य सचिव श्री अन्टोनी डिसा ने 14 मार्च, 2015 को वल्गेरि प्रजाति के पौध-रोपण से की थी। इस दिन यहाँ 25 प्रजाति के बाँस पौध का रोपण हुआ। आज हुए रोपण से यहाँ कुल प्रजाति संख्या 79 हो गयी है। पौध-रोपण का शुभारंभ महिला अधिकारियों ने किया, जिनमें सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती प्रियंका मिश्रा, प्राध्यापक एक्सीलेंस कॉलेज श्रीमती सुचित्रा बनर्जी, अमेरिका की श्रीमती मार्गरेट थामस, बाँस मिशन की अधिकारी सुश्री दीक्षा लोखंडे शामिल हैं।
मिशन संचालक राज्य बाँस मिशन डॉ. ए.के. भट्टाचार्य ने बताया कि करीब 100 प्रजाति के बाँस पौधों का रोपण होगा। इसमें सिक्किम से आने वाली 15 प्रजातियाँ अगले 2-3 दिन में भोपाल पहुँच जायेगी। लहारपुर उद्यान के 20 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किये जाने वाले बेम्बू सेटम (बाँस बगीचा) में कुल 200 ब्लॉक होंगे। हर ब्लॉक में प्रजाति अनुसार 10-10 पौधे लगाये जा रहे हैं। विकसित होने पर एक-एक भिर्रे में 40 से 200 बाँस उपलब्ध होंगे। बाँस बगीचे की तकनीकी देखभाल की जिम्मेदारी केरला फारेस्ट रिसर्च इंस्टीटय़ूट को दी गयी है, जो अब तक सर्वाधिक 68 प्रजाति के साथ देश का सबसे पहला और पुराना बैम्बू सेटम था। विश्व में 200 बाँस प्रजाति पायी जाती हैं, जिन्हें अगले 2-3 साल में लगाने का लक्ष्य है। चीन, वियतनाम, थाईलेण्ड से भी बाँस की पौध मँगवायी जा रही है। पार्क में बाँस का जर्म फ्लाज़्म बेंक भी बनाया जा रहा है, जो देश में इकलौता होगा।
तकरीबन 600 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला लहारपुर ईकोलॉजिकल पार्क सिटी फॉरेस्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। अभी तीन भाग में नक्षत्र वाटिका, औषधीय वृक्ष और बैम्बू सेटम विकसित किया जा रहा है, जो शहर को भरपूर ऑक्सीजन देंगे। भविष्य में यहाँ साइकिल ट्रेक, वॉकिंग स्ट्रिप, जॉगिंग पाथ भी बनाया जायेगा।
मिशन संचालक डॉ. भट्टाचार्य, वन संरक्षक श्री ए.के. सिंह, वन अधिकारी श्री जितेन्द्र गुफ्ता, श्री रवि खोडे, अमेरिका के संडेन फेमिली फाउण्डेशन के श्री स्टीवेन लेस्सिटर ने भी पौध-रोपण किया।

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