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विज्ञान की शाखाऍं (Branches of Science) – Exam Guider

विज्ञान की शाखाऍं (Branches of Science)

विज्ञान की शाखाऍं Branches of Science)

कृषि जैविकी(Agrobiology) – यह पादप जीवन (Plant Life) तथा पादप पोषण (Plant Nutrition) से सम्बन्धित विज्ञान की शाखा है।

एग्रोनॉमिक्स (Agronomies)-यह भूमि व फसलीं के प्रवन्ध से संबंधित विज्ञान है ।

एग्रोनॉमी (Agronomy)-इसमें खआद्यान्नों के उत्पादन कृषि से संबंधित तकनीकी एवं विकास का अध्ययन किया जाता है।

एग्रोस्टोलॉजी (Agrostology)-यह घास (Graas) के अध्ययन से संबंधित विज्ञान है ।

एलकेमी (Alehemy)-रसायन सम्बन्धी विज्ञान की शाखा

शारीरिकी (Anatomy)-यह जीव-जन्तुओं तथा पौधों की शरीर रचना से सम्बन्धित विज्ञान है।

मानव विज्ञान (Anthropology)-विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत मानव के विकास, रीति रिवाज, इतिहास और सामाजिक परम्पराओं से संबंधित विषयों का अध्ययन किया जाता है।

मधुमक्की पालन (Apieulture)-इसमें मधुमक्खियों के पालन तथा उनकी प्रजातियों के विकास का अध्ययन किया जाता है ।

आबोँ रीकल्चर (Arborieulture)- यह पेड़ों (Trees) तथा सब्जियों के उगाने से सम्बन्धित विज्ञान की शाखा है।

पुरातत्व विज्ञान (Archaeology)-यह शाखा प्राचीन ऐतिहासिक स्मारकों, प्राचीन संस्कृति एवं प्राचीन तथ्यों व अभिलेखों के अध्ययन से संबंधित है ।

ज्योतिष विज्ञान (Astrology)-इसमें ग्रहों, राशियों, नक्षत्रों एवं तारों की सापेक्षिक गति का अध्ययन कर मानव जीवन पर इसके प्रभाव का अध्ययन किया जाता है।

खगोल विज्ञान (Astronomy)-इसमें खगोलीय पिण्डों की गति का अध्ययन किया जाता है ।

(Astronautics)- इसमें अन्तरिक्ष यात्रा से संबंधित विषयों का अध्ययन किया जाता है।

खगोल भौतिकी (Astrophysics)-इसके अन्तर्गत आकाशीय पिण्डों में विद्यमान शक्तियों व उनके प्रभावों का अध्ययन किया जाता है ।

जीवाणु विज्ञान (Bacteriology)-यह जीवाणुओं की संरचना, उनसे सम्बन्धित रोगों व निदान से सम्बन्धित विज्ञान है।

जैव रासायनिकी (Biochemistry)– यह सजीवों के शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाओं के अध्ययन से सम्बन्धित विज्ञान है।

जीव विज्ञान (Biology)-यह सजीवों के अध्ययन से सम्बन्धित विज्ञान की शाखा है, जिसकी अनेक उपशाखायें हैं। इनमें दो प्रमुख शाखाएं-जंतु विज्ञान (Zoology) तथा वनस्पति विज्ञान (Botany) है।

जीवमिति (Biometry)-जीव विज्ञान में प्रयुक्त गणित व सांख्यिकी का अध्ययन इस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है।

जैवतांत्रिकी (Bionics)-विज्ञान की यह शाखा जन्तुओं के तंत्रिका तंत्र (Nervous System) के अध्ययन से सम्बन्धित है।


बायोनॉमिक्स (Bionomics)-किसी जन्तु या पौधे का वातावरण के साथ सम्बन्ध का अध्ययन इसी शाखा के अन्तर्गत किया जाता है।

बायोनॉमी (Bionomy)-जीवन के सिद्धान्तों (Law of Life) से सम्बन्धित विज्ञान है।

जैव भौतिकी (Biophysics)-सजीयों की जैविक क्रियाओं (Vital Processes) से सम्बन्धित भौतिक विज्ञान का अध्ययन इस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है ।

वनस्पति विज्ञान (Botany)-पौधों के अध्ययन से सम्बन्धि विज्ञान की शाखा है इसमें वनरपतियों का व्यापक अध्ययन किया जाता है।

मूर्तिका कला (Ceramics)-विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत काँच व चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने की विधियों का अध्ययन किया जाता है।

रसायन विज्ञान (Chemistry)-द्रव्य की संरचना तथा उसके गुणों का अध्ययन विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है ।

कीमोथैरेपी (Chemotherapy)-रासायनिक पदार्थों का प्रयोग करके रोगों का इलाज करने की विधियों का अध्ययन इस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है।

क्रोनोबायोलोजी (Chronobiology)-इस शाखा के अन्तर्गत जीवन की अवधि (Duration of Life) का अध्ययन किया जाता है ।

क्रोनोलोजी (Chronology)-विज्ञान की इस शाखा केअन्तर्ग त ऐतिहासिक तिथियों और तथ्यों को क्रमबद्ध रूप में रखने का अध्ययन किया जाता है।

कौन्कोलॉजी (Conchology)-जन्तु विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत मोलस्का वर्ग के जन्तुओं के बाह्य आवरण (Shell) का अध्ययन किया जाता है।

ब्रह्याण्ड विज्ञान (Cosmology)– विज्ञान की इस शाखा अन्तर्रगत वह्याण्ड की संर्चना, उत्पति एवं इतिहारा का अध्ययन कि जाता है।

सृष्टि विज्ञान (Cosmogony)-यह ब्रह्माण्ड की उत्पन्ति सम्बन्धी अध्ययन की शाखा है।

अपराध विज्ञान (Criminology)-इसर्म अपराध एवं अपराधियों का अध्ययन किया जाता है।

क्रिस्टल विज्ञान (Crystallography)-इसमें क्रिस्टल की संरचना, स्वरूप एवं गुणों का अध्ययन किया जाता है।

क्रिप्टोग्राफी (Cryptography)-सके अन्तर्गत गुढ़ लेखर सम्बन्धी झान का अध्यायन किया जाता है।

निम्न तापिकी (Cryogenics)-विज्ञान की इस शाखा अन्तर्गत अत्यन्त निम्न ताप की उत्पति, नियंत्रण एवं अनुप्रयोग क अध्ययन किया जाता है।

कोशिका रासायनिकी (Cytochemistry)-कोशिका विज्ञान (Cytology) की इस शाखा के अन्तर्गत कोशिका की रारायनिक क्रियाओं से सम्बन्धित अध्ययन किया जाता है।

कोशिकानुवांशिकी (Cytogenetics)-जीव विज्ञान की शाखा के अन्तर्गत कोशिका विज्ञान एवं आनुवंशिक विज्ञान के साथ आनुवंशिक गुणों का अध्ययन किया जाता है।

कोशिका विज्ञान (Cytology)-इसमें कोशिका की संरचना,  उत्पत्ति एवं कार्यों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।

क्रायो सर्जरी (Cryosurgery)-यह शत्य चिकित्सा वी अत्याधुनिक विधि है, जिसमें अतिशीतलन के द्वारा रोगाणु युका कोशिकाओं को नष्ट कर दिया जाता है।

अंगुलिछाप विज्ञान (Dactylography)-इसमें अंगुलिछाप (Fingerprints) से सम्बन्धित अध्ययन किया जाता है जिसका उद्देश्य विशिष्ट व्यक्ति की पहचान करना होता है।

संकेत विज्ञान (Dactyliology)-इसं संकेतों द्वारा संदेश पहुँ चाने की तकनीकी का अध्ययन किया जाता है।

पारिस्थितिकी (Ecology)-पौधों और जंतुओं पर वातावरण के प्रभाव का अध्ययन इस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है।

अर्थमिती (Econometrics)-आर्थक सिद्धान्तों के परीक्षण के लिए गणित का अनुप्रयोग इस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है।

अर्थशास्त्र (Economics)-इस शाखा के अन्तर्गत आर्थिक ज्ञान का अध्ययन किया जाता है।

भ्रूण विज्ञान (Embryology)-जीव विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत भ्रूण की सांरचना, प्रकार, उत्पत्ति एवं विकास का अध्यायन किया जाता है।

कीट विज्ञान (Entomology)-जीव विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत कीटों (Insects) का अध्ययन किया जाता है।

जनपादिक रोग निदान (Epidemiology)-यह चिकित्सा विज्ञान की शाखा है जिसमें जनपादिक रोगों (Epidemic Diseases) और उनके उपचार का अँध्ययन किया जाता है।

व्यवहार विज्ञान (Ethology)-इस शाखा के अन्तर्गत प्राणियों के व्यवहार (Behaviour) का अध्ययन किया जाता है ।

सुजननिकी (Eugenics) – यह आनुवांशिक विज्ञान की एक शाखा है जिसके अन्तर्गत मनुष्य की संतति के विकास व नस्ल सुधारने सम्बन्धी क्रिया-कलापों का अध्ययन किया जाता है।

जेनेकोलॉजी (Genecology)-पादप जगत के आनुवांशिक सगढन का आवास एव वातावरण के साथ अध्ययन इसाके अन्तर्गत किया जाता है।

जेनेसियोलॉजी (Genesiology)-इसके अन्तर्गत पीढ़ियों का अध्ययन किया जाता है।

भू-जैविकी (Geobiology)-यह पृथ्वी पर पाये जाने वाले जीवों के अध्ययन से सम्बन्धित विज्ञान की शाखा है।

भू-वनस्पतिकी (Geobotany)-यह वनस्पति- विज्ञान की शाखा है जिसके अन्तर्गत पौधों और पृथ्वी के धरातलीय सम्बन्धों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।

भू-रासायनिकी (Geochemistry)-इसमें भू-पर्पटी(earth’s crust) के रासायनिक संगठन एवं इसमें होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है।

भूगोल (Geography)-इस में पृथ्वी के धरातल, भौतिक दशाये, मौसम, जलवायु और जनसं ख्या से साम्बन्धित अध्ययन किया जाता है।

भूगर्भ-विज्ञान (Geology)-इस शाखा के अन्तर्गत भूगर्भ सम्बन्धी अध्ययन, उसकी बनावट, संरचना एवं इसमें पाये जाने वाले पदार्थों का अध्ययन किया जाता है।

भू-आकारिकी (Geomorphology)-इसमें भूमि के विभिन्न प्रकारों के लक्षण, उत्पत्ति एवं विकास का अध्ययन किया जाता है।

भू-भौतिकी (Geophysics)-यह भू-गर्भ में पाये जाने वाले पदार्थों के भौतिक गुणों के अध्ययन से सम्बन्धित विज्ञान की शाखा है ।

जीरोन्टोलॉजी (Gerontology)-इसमें वृद्धावस्था व इसमें होने वाले रोगों का अध्ययन कि या जाता है।

स्त्रीरोग विज्ञान (Gynaecology)-चिकित्सा विज्ञान की इस शाखा में र्त्री रोगों व प्रजनन से सम्बन्धित रोगों का अध्ययन किया जाता है ।

आनुवांशिक अभियांत्रिकी (Genetic Engineering) – यह विज्ञान की अत्याधुनिक शाखा है जिसके अन्तर्गत सजीवों में अति सूक्ष्म जान स्तर पर रचनात्मक परिवर्तन कर वांछित गुणों की प्राप्ति की जा सकती है।

सूर्य चिकित्सा विज्ञान (Heliotherapy)-इसमें सूर्य के प्रकाश द्वारा रोगों की चिकित्सा का अध्ययन किया जाता है।

ऊतिकी (Histology)-इसमें ऊतक अर्थात् कोशिकाओं के समूहों से सम्बन्धित अध्ययन किया जाता है।

उधान विज्ञान (Horticulture) -वनस्पति विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत फूल, फल, सब्जियाँं एवं आकर्षक पौधों को उगाने की कला का अध्ययन किया जाता है।

घड़ीसाजी (Horology)-इसमें घड़ी बनाने और समय की माप से सम्बन्धित अध्ययन किया जाता है।

होलोग्राफी (Holography)-लेसर किरणों द्वारा क्रिविमीय चित्रों का लेना होलोग्राफी कहलाता है।

होम्योपैथी (Homeopathy)-यह चिकित्सा विज्ञान की एक शाखा है जिसका आरम्भ जर्मनी में हुआ। इसमें रोग के कारकों को शर्करा से विभाजित कर उसी रोग के निदान में काम लिया जाता

जलगतिकी (Hydrodynamics)- गतिशील द्रव पदार्थो के बल, ऊर्जा एवं दाब का गणितीय अध्ययन इसके अन्तर्गत किया जाता है।

हाइड्रोग्राफी (Hydrography)-पृथ्वी पर जल स्तर का मापन इस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है जो कि समुद्री यात्रा के लिये उपयोगी है।

जल विज्ञान (Hydrology)-इसमें पानी के गुणों का अध्ययन किया जाता है।

हाइड्रोमेटेलर्जी (Hydrometallurgy)-इसमें सामान्य ताप पर द्रवों के साथ धातु अयस्कों (Metal Ores) को धोकर(Bleaching) उनसे धातुओं का निष्कर्षण (Extxaction) करने की प्रक्रिया का अध्ययन किया जाता है।

जल-चिकित्सा (Hydropathy)-जल के द्वारा रोगों की चिकित्सा का अध्ययन इस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है।

जलकृषि (Hydroponics)-इसमें मिट्टी के बिना पौधों को उगाया जाता है इसके लिए खनिज पदार्थों को द्रव में धोलकर उसमें पौधों को उगाया जाता है इसे मृदा-रहित कृषि या जल संवर्द्धन (Water Culture) भी कहते हैं।

जल ध्यनि शास्त्र (Hydrophonies) -विज्ञान की यह शाखा ध्यनि के माध्यम से जल सतह के नीचे की वस्तुओं का पता लगाने से सम्बन्धित है।

जल स्थैतिकी (Hydrostatics)-द्रयों में बल एवं दाब के गणितीय अध्ययन से सम्बंधित विज्ञान है।

मेगोग्रफी (Mammography)- यो Mammary Glands) की रेडियोग्राफी द्वारा स्तन कैंसर का आययन किया जाता है ।

धातु रचना विज्ञान (Metalography)-इसके अन्तर्गत विभिन्न धाु ओ की अकविक संरचना व गुणों का अध्ययन किया जाता है ।

धातुकर्म विज्ञान (Metallurgy)-इसके अन्तर्गत धातु के अयरक (Ore) से धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया का अध्ययन किया जाता

भौसम विज्ञान (Meteorology)-इस शाखा में वातावरण तथा इसमें होने वाले परिवर्तनों एवं अन्तः क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।

माप विज्ञान (Metrology)-इसमें तौल एवं नाप की विधियों का अध्ययन किया जाता है।

सूक्षम जैविकी (Microbiology)-इस शाखा के अन्तर्गत जीवाणु, दायरस माइक्रोप्लाज्मा आदि सूक्ष्म जीवों की संरचना एवं अन्य जीवों पर इनके प्रभाव का अध्ययन किया जाता है।

आकरिकी (Morphology)-इसके अन्तर्गत जंतुओं एवं पौधों की बाहरी संरचना (External Structure) का अध्ययन किया जाता है।

कवक विज्ञान (Myeology)-इसमें कवक (Pungi) की संरचना एवं जैविक प्रक्रियाओं तथा कदकों द्वारा जीवों में होने वाले रोगों का अध्ययन किया जाता है।

प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy)-इसमें जल, मिट्टी,आदि प्राकृतिक पदार्थों से असाध्य रोगों की चिकित्सा की जाती है आजकल यह चिकित्सा पद्धति लोकप्रिय होती जा रही है।

तंत्रिका विज्ञान (Neurology)-इस शाखा के अन्तर्गत तंत्रिका तंत्र (Nervous System) का विस्तार, कार्य एवं इसमें उत्पन्न होने वाले रोगों तथा अनियमितताओं का अध्ययन किया जाता है।

तंत्रिका रोग विज्ञान (Neuropathology)-इसमें तंत्रिका तंत्र में उत्पन्न होने वाले रोगों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।

तंत्रिका शल्य-चिकित्सा (Neurosurgery)-इसके अन्तर्गत तंत्रिका तत्र में उल्पन्न रोगों का शल्य क्रिया द्वारा इलाज किये जाने की विधियों का अध्ययन किया जाता है।

दंत विज्ञान (Odontology)-दाँत की संरचना और दंत विन्यास का आध्ययन राखा के अन्तर्गत किया जाता है।

प्रকাशिकी (0pties) -इसमें प्रकाश की प्रकृति, गुण तथा प्रकाश से संबधित अन्य विषयों का अध्ययन किया जाता है।

पक्षी विज्ञान (Ornithology)-इसमें पशियों के स्वभाव व्यवहार एवं उनके अन्य क्रिया-कलापों का अध्ययन किया जाता है।

आथोंपेडिक्स (Orthopaedics) -पेशीय कंकाल तंत्र के
रोगों के निदान, उपचार एव उनके अन्य क्रिया-कलापो का अध्ययन किया जाता है।

अस्थि विज्ञान ( Osteology)-इस शाखा के अन्तर्गत असिथयों का अध्ययन किया जाता है।

पेलियाबॉटनी (Paleobotany)-पौधों के जीवाश्मों (Fossils) से संबंधित अध्ययन इस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है।

जीवाश्मिकी (Paleontology)-इस में प्राचीन जीवाश्मों अध्ययन किया जाता है।

रोग विज्ञान (Pathology)-इस शाखा के अन्तर्गत रोग उत्पन्न करने वाले कारको की पहचान, उनकी संरचना व रोगों के निदान से सम्बन्धित अध्ययन किया जाता है।

प्रकाश जैविकी (Photobiology)- यह जीव विज्ञान की शाखा है जिसके अन्तर्गत जीवों पर प्रकाश के प्रभाव का अध्ययन किया जाता है।

कपाल विज्ञान (Phrenology)-इसमें मानव के कपाल (Skull) एवं मस्तिष्क (Brain) की सरचना का अध्ययन किया जाता

थिसियोलॉजी (Phthisiology)-इसमें क्षय रोग (Tuber-
culosis) का वैज्ञानिक अध्ययन कि या जाता है।

शैवाल विज्ञान (Phycology)-इसमें शैपाल से सम्बन्धित अध्ययन किया जाता है।

औषध विज्ञान (Pharmacology) -इस शाखा के अन्तर्गत औषधियाँ बनाने की विधियों तथा उनके गुणों का अध्ययन किया जाता

भौतिक विज्ञान (Physies)-इसमें द्रव्य के गुणों जैसे श्यानता, प्रत्यास्थता, पृष्त तनाव, संपीड़ यता एवं इनको प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन किया जाता है ।

भौतिक भूगोल (Physiography)-इसमें भी तिक पदार्थों के भूगोल से सम्बन्धित अध्ययन किया जाता है। इसमें प्रकृति की आकारिकी तथा उससे सम्बन्धित प्रभावों एवं क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।

शरीर क्रिया विज्ञान (Physiology)- जीव विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत सजीवों की विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं, जैसे- श्वसन, संदहन, परिसंरचना, वृद्धि, जनन आदि का अध्ययन किय जाता है। इसकी दो शाखायें हैं-जन्त शरीर क्रिया विज्ञान(Animal-physiology) तथा पादप शरीर क्रिया विज्ञान (Plant physiology)

पादप विकास विज्ञान (Phytogeny)- इसके अन्तर्गत पादप की उत्पत्ति एवं विकास का अध्ययन किया जाता है।

फल-कृषि विज्ञान (Pomology)-यह फलों के उत्पादन,विकास एवं सुरक्षा से संबंधित विज्ञान की शाखा है।

मनोविज्ञान (Psyehology)-यह मानव एवं अन्य जतुआं व्यवहार से सम्बन्धित विज्ञान है।

विकिरण विज्ञान (Radiology)-इसमें रेडियो ऐक्टिवता (Radio Activity) तथा एक्स-किरणों का अध्ययन किया जाता है ।

विकिरण-जैविकी (Radiobiology) जीव विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत सजीवों पर विकिरण (Radiation) के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।

विकिरण चिकित्सा (Radiotherapy) – इसके अन्तर्गत विकिरणों के द्वारा रोगों के निदान व इससे उत्पन्न होने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।

विकृति विज्ञान (Rheology)-पदार्थ की संरचना में उत्पन्न हो ने वाली विकृति तथा उसके प्रवाह से सम्बन्धित अध्ययन इस शाखा के अन्तर्ग त किया जाता है ।

भूकम्प विज्ञान (Seismology)-इस शाखा के अन्तर्गत भूकंप के कारणों व उसकी भविष्यवाणियों से सम्बन्धित वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।

चंद्र विज्ञान (Selinology)-चन्द्रमा का आकार, उत्पत्ति एवं गति से सम्बन्धित अध्ययन इस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है।

रेशमकीट पालन (Sericulture)-यह कच्चे रेशम के उत्पादन को बढ़ाने के लिए अच्छी नस्ल के रेशम कीटों के पालन करने से सम्बन्धित विज्ञान की शाखा है।

समाज शास्त्र (Sociology)-मानव समाज के वैज्ञानिकअध्ययन की शाखा है।

स्पेक्ट्रम विज्ञान (Speetroneopy) – स्वेक्ट्रर्कोप का प्रयोग करके पदार्थ एवं ऊर्जा का वैज्ञानिक अध्ययन इसके अन्तर्गत किया जाता है।

वर्गिकी (Taxonomy) -जीव विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत जंतुओं और पौधों को उनके गुणों एवं संरचना के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है ।

टेलीपेथी (Telepathy) -इसके अन्तर्गत रंवे दी तंत्रिकाओं (Sensorynervea) के स्थान पर अन्य किसी माध्यम से मस्तिष्क तक संवेदनाएँ भेजने की क्रिया विधि का अध्ययन किया जाता है।

चिकित्सा विज्ञान (Therapeuties) -इसमें रोगों के उपचार से सम्बन्धित अध्ययन किया जाता है।

ऊत्तक संवर्द्धन (Tissue Culture)– इसमें एक कोशिका
को रासायनिक पदार्थों की उपस्थिति में विकसित कर पूरे शरीर का निर्माण किया जाता है । यह विज्ञान की अत्याधुनिक शाखा है, जिसमें कृत्रिम रूप से शरीर का निर्माण किया जा सकता है ।

वायरस विज्ञान ( Virology)-इसमें वायरस की सरचना व उससे उत्पन्न होने वाले रोगों का अध्ययन किया जाता है।

जंतु विज्ञान (Zoology)-इसमें जंतुओं की संरचना, लक्षण एवं जीवन-चक्र का अध्ययन किया जाता है।

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