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भारत में जनसंख्या वृद्धि (Population Growth in India):

(i) सामान्य वृद्धि (1891-1921 .) (Normal Growth):

1921 ई. के पूर्व के तीन दशकों में दुर्भिक्ष एवं संक्रामक बीमारियों क प्रकोप के कारण वृद्धि दर अत्यन्त निम्न रही । 1891-1901 तथा 1911-21 के दशकों में तो वस्तुतः जनसंख्या में कमी देखी गई । चूँकि 1921 ई. के पूर्व जनसंख्या वृद्धि अत्यल्प रही थी ।

अतः 1921 ई. को ‘भारत की जनसंख्या का बृहत् विभाजक वर्ष’ (Great Divide Year) भी कहते हैं । इस समय तक भारत जनांकिकी संक्रमण के प्रथम चरण से गुजर रहा था । जन्मदर 48-49/1000 एवं मृत्युदर 42-48/1000 व्यक्ति था ।

(ii) मध्यम वृद्धि (1921-1951 .) (Moderate Growth):

1921 के बाद के तीन दशकों में कृषि उत्पादन में वृद्धि तथा यातायात साधनों में विस्तार से दुर्भिक्षों में कमी आई । संक्रामक रोगों की रोकथाम की गई । फलस्वरूप 1951 ई. में जन्मदर लगभग 40/1000 व्यक्ति तथा मृत्युदर 27.4/1000 व्यक्ति तक आ गया ।

 (iii) तीव्र वृद्धि (1951-2011 .) (Explosive Growth):

यदि 1921 ई. को भारत की जनसंख्या का वृहत विभाजक वर्ष (Great Divide Year) कहा जाता है, तो वहीं 1951 ई. को ‘जनसंख्या में भारी वृद्धि के प्रारंभिक वर्ष’ की संज्ञा दी जा सकती है । इसके बाद जनसंख्या की वृद्धि दर व निवल वृद्धि आश्चर्यजनक रूप से काफी अधिक रही है ।

1991 ई. (जन्मदर 30.5/1000, मृत्युदर 1.2/1000) के बाद भारत जनांकिकी संक्रमण की तीसरी अवस्था में प्रवेश कर गया है । यद्यपि 1991-2001 एवं 2001-2011 के दशकों में प्राकृतिक वृद्धि दर में गिरावट आई है, परंतु जनसंख्या आधार बड़ा होने के कारण निवल जनसंख्या वृद्धि लगभग 18 करोड़ रही है ।

वर्तमान समय में जन्मदर 21/1000 व्यक्ति एवं मृत्युदर 8/1000 व्यक्ति है । इस प्रकार अभी भी जनसंख्या वृद्धि की गति तेज है ।