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इतिहास का सबसे बड़ा समझौता – Exam Guider

इतिहास का सबसे बड़ा समझौता

Non performing assets
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में जारी की गई जानकारी के अनुसार दिसम्बर 2014 में देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियां (NPA)– 2,60,531 करोड़ रुपएI
RBI ने इस सम्बन्ध में दी गई जानकारी में बताया कि दिसम्बर 2014 की समाप्ति में जहाँ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियां (non-performing assets- NPAs) 2,60,531 करोड़ रुपए थीं वहीं 30 सबसे बड़े देनदारों की इन बैंकों पर चूक देनदारी (default) 95,122 करोड़ रुपए थी जोकि सकल गैर-निष्पादित सम्पत्तियों का लगभग एक-तिहाई (36.5%) है। 10 करोड़ रुपए से अधिक की बकाया देनदारी वाले देनदारों की संख्या 2,897 है तथा इनकी कुल चूक देनदारी 1,60,164 करोड़ रुपए थी।
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इतिहास का सबसे बड़ा समझौता
भारतीय रेल ने 11 मार्च 2015 को अपनी मूलभूत संरचना के विकास तथा सम्बन्धित परियोजनाओं के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपए का धन प्राप्त करने के लिए समझौता किया, जो उसके इतिहास का सबसे बड़ा समझौता है। यह समझौता वित्तीय संस्था –भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के साथ किया गया
इस समझौते के तहत LIC अगले पाँच वर्षों के दौरान भारतीय रेलवे को 1,50,000 करोड़ रुपए का धन उपलब्ध करायेगा। यह वित्तीय सहायता मौजूदा वित्तीय वर्ष (2015-16) से उपलब्ध कराई जायेगी तथा रेलवे इस धन का उपयोग मुख्यत: अपनी क्षमता में वृद्धि करने के लिए करेगी। इस निवेश कार्यक्रम के तहत LIC भारतीय रेलवेज़ वित्तीय निगम (IRFC) जैसी रेलवे की अनुषांगिक इकाइयों के बाण्डों में निवेश कर रेलवे को धन उपलब्ध करायेगी। इस बाण्डों की समयावधि 30 साल की होगी। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वर्ष 2015-16 के रेल बजट में कहा था कि वे बजट में किए गए 1,00,011 करोड़ रुपए के बजटीय प्रावधान के वित्त पोषण के लिए बाहरी स्रोतों से भी धन प्राप्त करने की कोशिश करेंगे।
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Sick PSUs
केन्द्र सरकार द्वारा 11 मार्च 2015 को संसद में दी गई जानकारी के अनुसार बीमार चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (Sick PSUs) की सूची में दो और इकाइयों को जोड़ा गया है। 31 मार्च 2014 तक इस सूची में शामिल उपक्रमों की संख्या 65 थी। इस सूची में जोड़ी गई ये दो इकाइयाँ– एयर इण्डिया और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL)I एयर इण्डिया (Air India) जहाँ एक समय नागरिक विमानन क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी कम्पनी थी वहीं MTNL मोबाइल टेलीफोन क्षेत्र की दिग्गज कम्पनी थी। इन दोनों उपक्रमों को बीमार सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों की सूची में जोड़ा गया है क्योंकि उनका संचित घाटा (accumulated losses) इनके पिछले चार वर्षों के औसत नेटवर्थ (average networth) के 50% से अधिक हो गया है, जोकि बीमार कम्पनी घोषित किए जाने का नियत प्रावधान है। इसके अलावा सरकार ने यह भी घोषित किया कि सार्वजनिक क्षेत्र के 5 उपक्रमों को बंद किया जायेगा। बंद किए जाने वाले इन उपक्रमों में HMT की तीन इकाइयाँ शामिल हैं। HMT एक समय देश में घड़ियों तथा ट्रैक्टरों के क्षेत्र की अग्रणी कम्पनी थी। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि बंद किए जाने वाले अन्य उपक्रम कौन से हैं।
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भारतीय स्टेट बैंक (SBI) समूह का वह कौन सा सहयोगी बैंक है जिसने 8 मार्च 2015 को अपनी ब्याज दर में कमी करने की घोषणा की तथा इसके साथ ही वह रेपो दर में कमी किए जाने के बाद ब्याज दर घटाने वाला पहला प्रमुख बैंक हो गया है – स्टेट बैंक ऑफ ट्रावणकोर (SBT)
स्टेट बैंक ऑफ ट्रावणकोर ने घोषणा की कि 16 मार्च 2015 से आधार-ब्याज दर (base rate) में 10 आधार अंकों की कमी कर इसे 10.15% कर दिया जायेगा। इस प्रकार यह बैंक RBI द्वारा रेपो दर में दो बार कमी किए जाने के बाद ब्याज दर घटाने की घोषणा वाला पहला प्रमुख बैंक बना है। उल्लेखनीय है कि स्टेट बैंक ऑफ ट्रावणकोर का मातृ बैंक SBI अभी ब्याज दर घटाने के बारे में अंतिम निर्णय लेने की प्रक्रिया में ही लिप्त है।
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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 13 मार्च 2015 को श्रीलंका के केन्द्रीय बैंक के साथ एक करेंसी स्वैप (मुद्रा की अदला-बदली) संधि की। इस संधि का मुख्य उद्देश्य श्रीलंकाई रुपए को स्थिर रखना हैI
उल्लेखनीय है कि श्रीलंकाई रुपए की कीमत में गिरावट का दौर जारी है तथा जनवरी 2015 से अब तक इसकी कीमत में लगभग 1.5% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। यह तब हुआ है जब देश के केन्द्रीय बैंक ने अमेरिकी डॉलर को बेच कर कीमत में गिरावट के दौर को नियंत्रित करने की कोशिश की है।
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बीमा की पहुँच (Insurance Penetration)
केन्द्र सरकार द्वारा 10 मार्च 2015 को संसद में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 के दौरान भारत में बीमा की पहुँच (Insurance Penetration) का प्रतिशत था – 3.9%
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 के दौरान देश में बीमा की पहुँच का प्रतिशत 3.9% तथा जोकि वैश्विक औसत 6.3% से कम है। उल्लेखनीय है कि बीमा पहुँच को बीमा प्रीमियम (insurance premium) के देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात के तौर पर उल्लिखित किया जाता है। वर्ष 2013 के दौरान जीवन बीमा की पहुँच 3.1% थी जबकि साधारण बीमा के लिए यह आंकड़ा 0.8% था। बीमा की पहुँच का आँकड़ा कई कारणों पर निर्भर होता है जैसे देश में आर्थिक गतिविधियों का स्तर, वित्तीय उपागमों में किए गए निवेश की मात्रा तथा बीमा उद्योग की स्थिति और आकार। यदि ब्रिक्स (BRICS) देशों के परिप्रेक्ष्य में भारत में बीमा की पहुँच की स्थिति का आकलन किया जाय तो यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत की स्थिति चीन और रूस से बेहतर है जबकि ये दक्षिण अफ्रीका से काफी पीछे और ब्राज़ील से कुछ पीछे है। दक्षिण अफ्रीका के लिए यह आँकड़ा 15.4%, ब्राज़ील के लिए 4%, चीन के लिए 3% तथा रूस के लिए मात्र 1.3% है।

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